- मानसून सत्र का समापन: मुख्यमंत्री ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, विकास और जनकल्याण पर दिया विशेष जोर
- VIDEO: इंस्टाग्राम दोस्ती से शुरू हुआ हनीट्रैप का खेल, बेटे को छुड़ाने पिता पहुंचे; अश्लील वीडियो बनाकर 26 लाख की फिरौती मांगने वाले गिरोह का खुलासा
- महाकाल की पहली सवारी को लेकर प्रशासन की तैयारी तेज, 30 जुलाई तक पूरे होंगे मार्ग विकास कार्य
- महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं टीवी एक्ट्रेस रूपाली गांगुली, नंदी हॉल में बैठकर किए बाबा के दर्शन, बोलीं- महाकाल की कृपा से हूं यहां तक
- श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भस्म आरती शृंगार दर्शन 23-07-2026
मुकुट से लेकर रुद्राक्ष माला तक: महाकाल को अर्पित हुई 9682 ग्राम चांदी की श्रंगार सामग्री, कीमत करीब 14 लाख रुपए!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार का दिन भक्तिभाव और आस्था से सराबोर रहा। इस अवसर पर दो भक्तों ने भगवान महाकाल के चरणों में विशेष श्रंगार सामग्री अर्पित की। यह सामग्री चांदी से निर्मित थी, जिसका कुल वजन 9682 ग्राम बताया गया।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह दान भक्त विपुल गुप्ता और सुशांत भल्ला द्वारा किया गया। दोनों श्रद्धालु यह दान तुषार शर्मा की प्रेरणा से लेकर आए थे। भक्तों का मानना है कि महाकाल के चरणों में अर्पण किया गया हर उपहार जीवन को सुख-समृद्धि से भर देता है और इसीलिए उन्होंने चांदी के आभूषण भगवान को समर्पित किए।
क्या-क्या शामिल था दान में
अर्पित की गई श्रंगार सामग्री में महाकाल के स्वरूप को निखारने वाले कई आभूषण शामिल थे। इनमें
-
एक मुकुट
-
एक छत्र
-
एक मुण्डमाला
-
एक त्रिपुंड
-
दो नागकुण्डल
-
तीन नेत्र
-
एक ओमकार
इसके साथ ही भक्तों ने 527.600 ग्राम चांदी से मढ़ी हुई रुद्राक्ष माला भी समर्पित की। यह माला महादेव के रुद्र रूप की प्रतीक मानी जाती है।
14 लाख रुपए आंकी गई कीमत
बाजार मूल्य के अनुसार इस पूरे दान की कीमत लगभग 14 लाख रुपए बताई जा रही है। आभूषणों का वजन और मूल्य देखकर यह भेंट महाकाल मंदिर में हाल के समय की सबसे विशेष अर्पणों में गिनी जा रही है।
मंदिर समिति ने किया सम्मान
मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक आशीष फलवड़िया ने दानदाताओं का सम्मान किया और उन्हें मंदिर की ओर से प्रमाण स्वरूप रसीद प्रदान की। समिति के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे दान न केवल मंदिर की परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि समाज में भी आस्था और दान की भावना को मजबूत करते हैं।